Educational Suggestion: Life में केवल पुस्तकीय ज्ञान काफी नहीं हे

Educational Suggestion जो आपको जीवन में काफी काम में आएगा, आपने यह तो सुना होगा की “व्यवहार कुशलता के बिना प्रतिभा काम में नहीं आती”, केवल पुस्तकीय ज्ञान से कुछ नहीं होता, ज्ञान की सार्थकता तभी हे जब वह हमारे जीवन में उतरे, हमे वह ज्ञान से कभी कोई फायदा नहीं होगा जो हमने experience से सिखा न हो और जो केवल हमारे विचारो तक ही सिमित हो.

कई लोग ऐसे होते हे जो व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करने के बजाय केवल books ही पढ़ते रहते हे लेकिन उसका सही अर्थ समज नहीं पाते, क्युकी practical स्तर पर वह books से प्राप्त किये गये ज्ञान को आत्मसात नहीं कर सकते, शास्त्र, ग्रन्थ या पुस्तक हमको केवल आगे बढ़ने का मार्ग ही दिखाते हे, यदि हमने एकबार उनके द्वारा दिखाए गये मार्ग को जान लिया तो फिर हमे शास्त्र और ग्रंथो की जरुरत बहुत ही कम रहती हे, क्युकी बाद में तो हमे उस मार्ग पर चलना होता हे और आगे बढ़ना होता हे.

educational

Educational Suggestion With Great Example

एकबार एक आदमी को उसके गाव से लिखा गया letter मिला, उसमे उसके relatives को क्या क्या gift देनी हे वह लिखा था, gift खरीदने जाने से पहले उसने दुबारा उस letter को पढ़ा, जिससे की उसको बरोबर याद रह जाए और यह confirm हो जाए की क्या क्या चीजे खरीदनी हे, लेकिन उससे वह letter खो गया और काफी ढूंढने के बाद भी उसको वह letter नहीं मिल रहा था, वह परेशान होकर कागज़ ढूंढने लगा और काफी खोजने के बाद उसको वह कागज़ अपने bed के निचे पडा मिला.

अटल विश्वास से विजय की प्राप्ति होती हे 

Letter में क्या क्या चीजे gift करनी हे उसकी list थी, 5 किलो मिठाई, कमीज, साड़ी और दूसरा कुछ सामान भेजना था, उसने एक बार उस कागज़ को दुबारा पढ़ लिया फिर उसे वह कागज़ की जरुरत न रही, वह कागज़ को घर में छोड़कर उसमे लिखी चीजे खरीदने के लिए चला गया, उसको कागज़ की जरुरत तब तक ही थी जब तक उसको वह कागज़ में क्या लिखा हे वह जान नहीं लेना था, एक बार उसने वह जान लिया की वह कागज़ में क्या क्या लिखा हे फिर उसको वह कागज़ की जरुरत न के बराबर थी.

Charity-परोपकार का फल हमे अवश्य मिलता हे 

उसी तरह शास्त्र, books और ग्रन्थ में इश्वर के नजदीक पहुचने का रास्ता बताया जाता हे, life में आगे बढ़ने का और साधना करने का मार्ग दिखाया जाता हे,विधि बताने में आती हे,उसे पढना और जानना तो सही हे लेकिन यदि उसे जीवन में व्यवहारिक रुपमे लाया न जाए तो उन शास्त्रों, ग्रंथो और books की बातो का हमारे जीवन पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता हे, वह हमे तब तक लाभ नहीं दिला सकते जब तक हम उनके द्वारा प्राप्त किये गये ज्ञान को हमारे अनुभव में नहीं उतारते.

इश्वर की शक्ति के अनुसन्धान में भगवान Shree Krishna और Arjuna की great story

एक ही चीज अलग अलग books में अलग अलग तरीके से वर्णित की होती हे जिसे पढ़कर मन में भ्रम पैदा होता हे, लेकिन यदि उनमे लिखी चीजो का अनुभव कर लिया जाए तो वह वास्तविक ज्ञान बन जाता हे,फिर हम उस प्राप्त किये गये अनुभव को विविध तरीको से व्यक्त कर सकते हे,उसको विस्तार से समजा सकते हे,लेकिन जब तक उसका अनुभव प्राप्त नहीं होता हे तब तक मन में उसके प्रति प्रश्न और शंकाये ही रहती हे.

Educational Suggestion

ऐसा कहने में आता हे की ज्ञान वृद्धि के लिए पढने से ज्यादा सुनना अच्छा हे और सुनने से भी ज्यादा बेहतर हे देखना और अनुभव करना.

Example के तोर पर खुद पढने से अच्छा किसी अनुभवी शिक्षक के मुह से सुनना ज्यादा अच्छा हे, क्युकी उनको उस विषय में जानकारी ज्यादा गहरी होती हे, उससे भी अच्छा हे उसका अनुभव करना, क्युकी यदि प्रत्यक्ष अनुभव कर लिया तो कोई शंका-कुशंकाए रहती नहीं हे.

Educational Example

यदि इस विषय में एक छोटा example दिया जाये तो यदि कोई Taj Mahal के विषय में थोडा पढ़ ले तो केवल पढने मात्र से वह Taj Mehal के विषय में जान नहीं पायेगा,लेकिन यदि जो प्रत्यक्ष जाकर ताज महल देख आया हो उसके मुख से ताज महल के विषय में सुनना अच्छा रहेगा और उससे भी बेहतर रहेगा यदि हम प्रत्यक्ष जाकर ताज महल देख आये.

हम खुद जाए वह हे अनुभव से प्राप्त किया गया ज्ञान.

बेशर्म और लज्जाशील व्यक्ति की मानशिकता में क्या फर्क हे?

जो अपने पास इकट्ठी की गई जानकारी का अभिमान रखता हे, उनका मन व्यर्थ तर्क-वितर्क में फसा हुआ रहता हे और उसके कारन वह सत्यसे वंचित रहते हे, books, ग्रन्थ और शास्त्र पढना भी एक महत्वपूर्ण लाभ हे, क्युकी यदि स्वाध्याय की परम्परा ही नहीं रहेगी तो सत्य को प्राप्त करने की जिज्ञासा कभी जन्म नहीं लेगी.

उसके साथ साथ यह भी सच हे की केवल पुस्तको में लिखी बातो तक ही जीवन सिमित कर लेना स्वयम को सास्वत सत्य की अनुभूति से वंचित रखना बरोबर हे,इसलिए हमको books, ग्रन्थ, शास्त्र का अध्याय तो करना चाहिए लेकिन साथ साथ उसमे दिए गये उपदेश को अनुभव में अपनाने का प्रत्न भी करना चाहिए, क्युकी अनुभव से प्राप्त किया ज्ञान ही परम सत्य कहा जा सकता हे.

If you like this educational suggestion then please share it on social media.

 

 

 

(Visited 81 times, 1 visits today)