Faith in God: भगवान में श्रद्धा रखे, फल जरुर प्राप्त होगा

Faith in God; इश्वर में श्रद्धा, विश्वास वह शक्ति हे जिससे उजड़ी हुई दुनिया में भी प्रकाश किया जा सकता हे, इश्वर पर श्रद्धा यदि सच्ची होगी तो वह कबूल जरुर होगी, कुछ लोग कहते हे की इश्वर नजर नहीं आते, लेकिन सच बात तो यह हे की जब friends, relatives और अपने साथ नहीं देते तब सिर्फ इश्वर ही नजर आते हे.

faith in god

श्रद्धा दो शब्दों से बना शब्द हे 1.श्रत means मानना, 2) धा means धारण करना, हमारी श्रद्धा जितनी बड़ी होगी उतना बड़ा फल हमे प्राप्त होगा, हमे भगवान, गुरु, शास्त्र, और संत में श्रद्धा रखनी होती हे, श्रद्धा पुरूषार्थ का प्राण, success का स्तम्भ और साधना का सेतु हे, जो मनुष्य शंका और कुशंकाओ में फसा रहता हे वह किसी प्रकार के ध्येय तक पहुच नहीं पाता, वह कोई भी बड़ी चीज हासिल नहीं कर सकता.

मनुष्य शंका-कुशंका, तर्क-वितर्क के साथ जी नहीं सकता लेकिन श्रद्धा के श्वास से जरुर जी सकता हे, मनुष्य का पूरा जीवन जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रद्धा(faith) के दम पर ही चलता हे, एक छोटा बच्चा पापा की ऊँगली पकड़ कर चलता हे तब उसे अपने पापा पर पूरी श्रद्धा होती हे की वह उसे कभी गिरने नहीं देंगे, जब आप bas, train में travel करते हे तब आप driver पर श्रद्धा रखकर ही उसमे बैठते हे की वह आपको आपकी मंजिल तक जरुर पहुचायेगा, आप जब doctor से दवा(medicine) लेते हे तब इस श्रद्धा और विश्वास से ही लेते हे की उससे आपकी बीमारी जरुर दूर होगी.

विस्वास यदि अटल होगा तो पत्थर मेंसे भी परमात्मा प्रकट हो जायेंगे.

छोटे से लेकर बड़ा कार्य हरेक में श्रद्धा रखना अनिवार्य हे, Faith in God.

श्रद्धा बुद्धि से भी परे हे-Rabindranath Tagore.

जिन्होने गुरु और भगवान में श्रद्धा रखी हे वह सूखी हुए हे, काफी साल पहले की बात हे जब भगवान स्वामीनारायण गाव गाव घूमकर लोगो को सदाचार और नैतिकता के पाठ सिखाते थे,उनके लिए गरीब और अमीर सब एक समान थे, वह सबको ज्ञान, धर्म, वैराग्य और भक्ति के पाठ सिखाते.

Faith in God: Short Story of Bhagwan Swaminarayan

भगवान स्वामीनारायण का रुपाशा नाम का भक्त था, उसके गाव में एक दिन भगवान Swaminarayan गये, वहा गाव के सभी भक्त प्रभु को अपने घर ले जाते और सत्संग का लाभ उठाते, रुपाशा के मन में भी यह इच्छा हुई की वह प्रभु को घर बुलाये और उन्हें भोजन खिलाये, लेकिन वह सोचमे पड़ गया की प्रभु आयेंगे तो उन्हें क्या खिलायेगा.

उसके मन में यह प्रश्न तो उठा लेकिन फिर भी वह प्रभु के पास जाकर आमंत्रण दे आया, भगवान उसके मन की व्यथा जानते थे, इसलिए उन्होंने उसे कहा हम तुम्हारे घर जरुर आयेंगे लेकिन तुमको हमारे लिए दाल और रोटी ही बनानी पड़ेगी, वह घर आया और अपनी पत्नी को कहा, कल प्रभु भोजन करने आ रहे हे इसलिए दाल और रोटी ही बनाना.

उसकी यह बात सुनकर पत्नी ने कहा की भगवान हमारे घर आ रहे हे और हम उन्हें केवल दाल रोटी ही खिलाएंगे यह ठीक नहीं हे,यह मेरे कुछ आभूषण(Jewelery) हे, इसे बेचकर कुछ सामन ले आइये हम उनको लाडू, दाल, चावल, सब्जी सभी खिलाएंगे, भगवान उनके घर पधारे, उन्होंने खाना देखकर रुपशा से कहा आप ऊपर से तो गरीब दिख रहे हे लेकिन खाना देखकर आप काफी अमीर लग रहे हे.

रुपाशा ने कहा आप मुझे मिले यह मेरा अहोभाग्य हे, आपका आशीर्वाद हे इसलिए में काफी अमीर हु, आप कृपाकर खाना आरम्भ करे, भगवान ने कहा हमे 500 रुपयों की जरुरत हे, आप वह भेट रखेंगे तो हम खाना आरम्भ करेंगे, रुपाशा ने सोचा यह मेरा अहोभाग्य हे जो भगवान मुझसे कुछ मांग रहे हे, वह फट से अपनी पत्नी के पास गया और भगवान के द्वारा कही गई बात उसे बताई, पत्नी ने वापिस उसे कुछ आभूषण दिए वह गिरवी रख 500 रूपये लाकर उसने भगवान के पास रखे, भगवान उसकी श्रद्धा देखकर काफी प्रशन्न हुए.

जाते वक्त प्रभु ने उससे कहा की आप यह पैसे लेकर हमारे साथ चलिए, उस 500 रुपयों से भगवान ने रुपाशा को 100 ton अनाज खरीदकर दिया और कहा की इसे अपने साथ ले जाइए और इसे सम्भालकर रखना और हम जब इसे मांगे तब हमे भेज देना.

दुसरे साल अकाल पडा, समय ऐसा था की लोगो के पास खाने के लिए अनाज का एक दाना भी नहीं था, रुपाशा को अनाज चोरी का डर सताने लगा उसने भगवान को संदेश भिजवाया की मुझे अनाज चोरी हो जाने का डर सता रहा हे कृपा कर आप मुझे कहे तो में इसे आपके यहाँ भिजवा दू.

भगवान ने उसे कहा की वह अनाज तुम्हारा ही हे इसलिए उसे बेच दो और उससे जो पैसे आयेंगे उसे अपने पास रख लेना, उसने वह अनाज को काफी ऊँचे दामो में बेचा और उससे उसे काफी मुनाफा हुआ,इस तरह भगवान स्वामीनारायण ने उसका आमंत्रण स्वीकार कर उसकी गरीबी को दूर कर दिया.

हमे बिना शंका-कुशंका किये भगवान पर श्रद्धा रखनी चाहिए, आपने कृष्ण-सुदामा, नरसिह मेहता की कहानी जरुर सुनी होगी, वह हमारे दुःख-दर्द जरुर दूर करेंगे, Faith in God is everthing.

 

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