महाग्रंथो के 5 Free Inspirational Quotes जिससे हरेक काम मे सफलता प्राप्त होगी

महाग्रंथो के 5 Free Inspirational Quotes, यदि आप अपने कार्यो में सफलता प्राप्त करना चाहते हे और नुकशान से बचना चाहते हे तो यहाँ जो 5 चुनी हुई बाते बताई गई हे उनको जानिए और उनसे बचकर रहिये.

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Free Inspirational Quotes About Life in Hindi

1. अज्ञान(Knowledge) और अधुरा ज्ञान

यह तो आप भली भाती जानते होंगे की यदि किसी कार्य में success प्राप्त करनी हे तो ज्ञान का होना आवश्यक हे, अज्ञान, अधुरा ज्ञान या अधूरी जानकारी हमेशा परेशानियों का कारण बनती हे, इसलिए व्यक्ति को हमेशा ज्ञान प्राप्त करते रहना चाहिए और उसके लिए प्रयास करते रहने चाहिए,हमारे पास जीतनी अधिक जानकारी होगी उतना ही ज्यादा हमारा दिमाग active रहेगा और हम अच्छे और बुरे दोनों समय में सही deccission ले सकेंगे.

सही और गलत में योग्य की पसंदगी करना आसन तो हे लेकिन दोनों अच्छी चीजो में सबसे अच्छी कौनसी हे वह जानना आवश्यक हे, यदि हमारे पास जरुरी जानकारी होगी तो हम सही समय पर सही निर्णय ले सकेंगे और उससे लाभ प्राप्त कर सकेंगे और नुकसानी से दूर रह सकेंगे.

महाभारत का महत्वपूर्ण प्रसंग

अज्ञान या अधुरा ज्ञान कभी भी नुकसान पंहुचा सकता हे,इसका श्रेष्ठ उदाहरन Mahabharat में देखने को मिलता हे,महाभारत का युद्ध चल रहा था और जब कौरवो की और से चक्रव्यूह की रचना करने में आई  तब इसके लिए अभिमन्यु का चुनाव किया गया क्युकी वह चक्रव्यूह में प्रवेश करना जानता था, लेकिन उसको चक्रव्यूह मे से बाहर निकलना पता नहीं था और इसी वजह से वह उसमे फस गया और वीरगति को प्राप्त हुआ, उसी तरह आज भी अधुरा ज्ञान या अधूरी जानकारी problem में फसा सकती हे, इसीलिए हमेशा knowledge को बढ़ाते रहना चाहिए.

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2.अहंकार(Ego)

अहंकार मतलब की खुदको श्रेष्ठ समजना और दुसरो को तुच्छ, जो लोग केवल ‘I am something’ और अहंकार की भावना के साथ जीते हे वह life में कभी भी success प्राप्त नहीं कर सकते, यदि किसी काम में उनको सफलता मिल भी गई तो वह स्थायी नहीं होती, अहम की भावना व्यक्ति के पतन का कारण बनती हे.

यदि इसके example की बात करे तो रामायण में रावन ने श्री राम को तुच्छ समजा था और उनकी पत्नी का अपहरण कर उन्हें लंका ले गया था,यह भी अहंकार की सबसे बड़ी घटना हे जिसके कारण रावन का पतन हुआ था.

कंस ने श्री कृष्णा को तुच्छ समजा था और दुर्योधन ने भी पांड्वो के साथ ऐसा ही किया था उसने भी उन्हें तुच्छ समजा था और इसका परिणाम हमारे सामने ही हे, उन तीनो रावन, कंस और दुर्योधन का अंत हुआ केवल और केवल गलत अहंकार के कारण ही.

3.बहुत अधिक मोह(Temptation)

किसी भी चीज में जरुरत से ज्यादा मोह problems का कारण बन सकता हे, कई लोग अत्यधिक मोह के कारण सही और गलत के बिचमे भेद नहीं कर सकते, फिर वह चाहे बच्चो का मोह होगा, स्त्री मोह होगा, पुरुष मोह होगा, पैसो का मोह होगा, इस मोह की जाल में फसकर वह सबकुछ करते हे जो उन्हें नहीं करना चाहिए,मोह को जड़ता का प्रतीक माना जाता हे,यह व्यक्ति को बांधकर रखती हे और आगे नहीं बढ़ने देती, मोह में फसा व्यक्ति अपने बुध्धि का उपयोग भी सही से नहीं कर सकता,यदि व्यक्ति इसमें से बाहर नहीं निकलेगा तो वह कार्यो में कभी सफलता प्राप्त नहीं कर सकेगा.

महाभारत में धुतराष्ट्र को युधिस्ठिर और हस्तिनापुर के राज पाठ के साथ सबसे ज्यादा मोह था और इसके कारण ही उन्होंने दुर्योधन के द्वारा किये गये सभी गलत और अधार्मिक कार्यो को हमेशा अनदेखा किया और उसमे वह मौन ही रहे और इसी मोह के कारण पुरे कौरव वंश का सर्वनाश हो गया.

4.क्रोध(Anger)  

जब किसी के मन की बात पूरी नहीं जो सकती,जैसे किसी ने कहा नहीं माना, किसी ने कुछ गलत किया तब क्रोध का आना स्वभाविक हे,लेकिन जो लोग क्रोध को सम्भाल लेते हे, वह नजदीकी भविष्य में सफलता प्राप्त करते हे,जबकि जो लोग क्रोध को सम्भाल नहीं सकते और आवेश में आकर गलत काम कर डालते हे वह परेशानियों का सामना करते हे और सफलता उनसे कोसो दूर रहती हे.

रामायण में रावण ने यही गलती की थी, उसने क्रोध में आकर विभीषण को लंका से बाहर निकाल दिया था,उसके बाद विभीषण श्री राम की शरण में चले गए थे और युध्ध में विभीषण ने ही राम को रावण की मृत्यु का कारण बताया था,क्रोध और आवेश में आकर व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले सकता इसलिए क्रोध को काबुमे रखना चाहिये और उसके लिए जरुरत हो तो meditation करना चाहिए, meditation से क्रोध को काबू करने में मदद मिलती हे.

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5.डर(Fear): मौत का या असुरक्षा का 

जिन लोगो को असुरक्षा की भावना होती हे वह किसी कार्य में एकाग्रता से कार्य नहीं कर सकते,वह हरेक क्षण खुद को असुरक्षित महसूस करते हे और खुदको सुरक्षित करने के विषय में सोचते रहते हे.

राजा कंस ने जब आकाशवाणी से सुना की देवकी की आंठ्वी सन्तान उसका काल बनेगी तब वह बहुत डर गया, वह मृत्यु के डर से खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा, और इसी डर के कारण उसने अपनी बहन की सात संतानों को जन्म के साथ ही मौत के घाट उतार दिया,कई ऐसे कार्य किये जिससे उसका पाप का घडा भरता गया, उसने कृष्ण को मारने के हजारो प्रयाश किये लेकिन उसको सफलता प्राप्त न हो सकी और अंत में कृष्णा ने उसका अंत किया.

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