Give Receive: जो देगा वह प्राप्त करेगा

Give(देना), जो देगा वह प्राप्त करेगा, यह एक universal law हे, charity, donation कभी व्यर्थ नहीं जाता उसका फल हमे जरुर प्राप्त होता हे, यदि हमने किसी के लिए कुछ किया, किसी की help की, किसी के जीवन में कुछ योगदान दिया, तो यह जरुरी नहीं हे की हमे उसी व्यक्ति के पास से मिलेगा, लेकिन दुसरे किसी व्यक्ति के पास से, दुसरे किसी समय पर जरुर मिलेगा.

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You will receive abundance for your giving, The more you give, the more you will have! – W.Clement Stone

हम कई बार सोचते हे की अब जमाना बदल सा गया हे, सब स्वार्थी हो गये हे और केवल अपने ही बारेमे सोचते हे, पहले जब किसी के घर कोई मेहमान आते तो चहरे पर हसी आ जाती थी लेकिन अब मेहमान को देखते ही चेहरा मुरझा जाता हे, पहले था “अतिथि कब आओगे” अब अतिथि कब जाओगे” पहले वह दिन थे जब लोग सोचते थे “कोई आये तो खाए अब यह दिन हे जब लोग सोचते हे “सब जाए तो खाए”.

अब जैसे किसी की help करना, किसी को खिलाकर खाना, किसी को देकर खुश होना, किसी की ख़ुशी के लिए कुछ करना life की dictionary में से ही निकल गया हो ऐसा लगता हे, पहले ऐसा वक्त था जब लोग दुसरो के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर देते थे, हमारी भारतीय संस्कृति, शास्त्र, गुरु, संत ने जो हमे सिखाया हे वह याद करने जैसा हे.

Will Give-Will Receive: हम किसी की मदद करेंगे तो हमे भी मदद जरुर मिलेगी

एक गुरूजी अपने शिष्य के यहाँ खास अवसर पर पधारे, अपने यहाँ गुरूजी आने वाले थे इसलिए सत्संग का लाभ उठाने के लिए शिष्य ने अपने friends, relatives, पड़ोसि सबको निमंत्रण दिया, गुरूजी सत्संग सभा में सम्बोधन कर रहे थे की, भगवान् ने हमे मनुष्य जन्म दिया हे तो हमे इसका सदुपयोग करना चाहिए, हमे जितना हो सके उतना लोगोकी सहाय करनी चाहिए, गरीबो की मदद करनी चाहिए, हम किसी की मदद करेंगे तो हमे भी मदद जरुर मिलेगी.

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गुरूजी का यह संदेश वहा उपस्थित सभी लोग बहुत शांति से सुन रहे थे, तभी एक व्यक्ति खड़ा हुआ और बोला, गुरूजी! मेरा एक प्रश्न हे, यदि आप अनुमति दे तो में पुछू?

गुरूजी ने अनुमति दी.

गुरूजी! आपने जो बात कही हे वह मेरी समज में नहीं आ रही, मैंने मेरे एक friend की निःस्वार्थ भाव से बरसो तक मदद की, लेकिन मेरे उस friend ने मेरी मदद करना तो ठीक लेकिन मेरा आभार तक नहीं माना.

गुरूजी वह व्यक्ति की बात सुनकर मुस्कुराये और कहा, हम किसी को कुछ देते हे तो हमे वह वापिस जरुर मिलता हे, यह universal law हे, लेकिन हम एक बड़ी गलती करते हे, वह गलती यह हे की, हम जिसको देते हे उसी के पास से हमको मिले ऐसी अपेक्षा रखते हे, लेकिन काफी बार ऐसा नहीं होता, हमने किसी की मदद की हो लेकिन हमे जब जरुर हो तब हमे दूसरी किसी व्यक्ति के पास से मदद मिलती हे.

“You cannot get something for anything! unless you give, you have no room to receive”

गुरूजी यही बात उस व्यक्ति को समजा रहे थे और वह व्यक्ति उनके साथ दलीलबाजी कर रहा था तभी उसका बेटा आया और कहने लगा पप्पा-पप्पा मेरा school में 1st नम्बर आया हे, मुझे इनाम मिला हे, मुझे इनाम देने special guest आये थे और उन्होंने मुझे आगे अभ्यास के लिए 60000 रूपये का cheque दिया हे.

हम किसी की बिना स्वार्थ के help करते हे तो वह कभी व्यर्थ नहीं जाती, यदि हमे कुछ मिलेगा नहीं तो हमने किसी के लिए कुछ किया हे का आत्मसंतोष तो जरुर मिलेगा.

यदि हमारी देने की नियत होगी तो हमारा भला अपने आप हो जाएगा, वह नहीं चाहता की उसका फायदा हो(जिसके लिए हमने कुछ किया हे) लेकिन वह(उपरवाला) चाहता हे की उसका फायदा हो और इधर-उधर से उसका फायदा हो ही जाता हे.

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