Happiness Thoughts: सुख-दुःख की परिभाषा

Happiness thoughts: खुशी के विचार और दुःख के विचार- मनुष्य जीवन में सुख और दुःख का चक्र चलता ही रहता हे, यह धुप और छाव की तरह हे, कभी धुप हे तो कभी छाव हे, सुख मतलब की अच्छा महसूस होना, दुःख मतलब की बुरा महसूस होना, सुख और दुःख खुद निर्मित होते हे, यह निर्भर करते हे हमारे विचारो पर, यदि किशी चीज या परिस्थिति के प्रति हमारे विचार सकारात्मक हे तो हमे सुख प्राप्त होगा और यदि हमारे विचार नकारात्मक हे तो हमको दुःख की प्राप्ति होगी, सुख और दुःख का अनुभव हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता हे.

Happiness thoughts

में सोचता हु की वह सुखी हे, वह सोचता हे की में सुखी हु – Happiness Thoughts

जीवन जरुरी सभी चीजे हमारे पास होगी, लेकिन हम जब हमसे ज्यादा पैसेवाले व्यक्ति का वैभव(Splendor) देखेंगे तो हमे दुःख होगा, हमे लगेगा की यार यह कितना सुखी व्यक्ति हे, लेकिन यदि हम उस व्यक्ति को छोड़कर दूसरी और नजर करेंगे तो हमारे आसपास ऐसे कई लोग हे जो झोपड़ी में रहते हे और जिनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं  हे और खाने के लिए खाना नहीं हे, उनको किसी दिन काम मिलता हे तो किसी दिन नहीं मिलता और जिस दिन उन्हें काम नहीं मिलता उस दिन उन्हें भूखे सोना पड़ता हे, यदि हम उनके साथ हमारी तुलना करेंगे तो हम उनके मुकाबले कई गुना ज्यादा सुखी हे.

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हमारी मान्यता कुछ ऐसी हे की जिनके पास धन दौलत हे, नोकर-चाकर हे, गाडी हे, बंगला हे, घर के आँगन में 2-3 Audi-Mercedes या BMW Car पड़ी हे वही सुखी हे, हमारी यह सोच बिलकुल गलत हे, सुख कोई चीज नहीं हे, हमारे देखने के नजरिये का नाम ही सुख हे, कई धनवान लोग ऐसे भी होते हे जो सामान्य व्यक्ति की तुलनामे काफी परेशान और दुखी होते हे, वह रात को चेन से सो भी नहीं पाते.

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केवल हमको लगता हे की वह सुखी हे और हम उनकी नकल करते हे, हम वह चीजे प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करते हे जो उनके पास हे, उनकी नक़ल करते हे, लेकिन यदि दिल खोलकर देखा जाए और समजने की कोशिस की जाए तो हम उनको सामान्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा दुखी देख सकते हे.

Happiness Thoughts

आपने Ford Motor Company के founder Henry Ford का नाम तो सुना होगा, वह दुनिया का सबसे धनवान आदमी था, उसने अपने जीवन के अंत काल में कुछ शब्द अपनी diary में लिखे थे जो कुछ इस प्रकार थे “में अपनी factory में मजदूरो को मोटी और सख्त रोटी खाते देखता हु, गहरी नींद में सोते हुए देखता हु तो मुझे उनकी ईर्ष्या होती हे”, में Henry Ford दुनिया का सबसे अमीर इन्शान हु लेकिन मुझे कभी नींद नहीं आई, लम्बे समय से में सोया नहीं हु, खाना भी मुझे कभी पचा नहीं हे.

Henry ने लिखा, “हे भगवान! मेरी जब मौत हो और जब मेरा दूसरी बार जन्म हो तो, में यह चाहता हु की मुझे किसी factory में लोहा काटने का काम मिल जाए, में मजदूरो के साथ काम करू, हथौड़ा चलाता रहू जिससे मेरा पेट सही तरीके से कार्य करे, मुझे अच्छी नींद आये”.

Henry Ford समजते थे की मजदुर सबसे सुखी और अमीर व्यक्ति हे, जबकि मजदूर समजते थे की Henry Ford सुखी और अमीर हे, इस तरह दोनों एकदूसरे को सुखी और अमीर व्यक्ति मानते थे, सोच सोच का फर्क था.

कौन सुखी और कौन दुखी? यह सवाल का सही जवाब हमारे विचारो में हे, हमारे नजरिये में हे.

 

 

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