Magical Inspiring Words Of Gurdjieff’s Father In Hindi

Inspiring words of Gurdjieff’s father-Great philosopher Gurdjieff अपने जीवन की बात करते हुए कहते हे की मेरे father द्वारा कही गई एक छोटीसी बात ने मेरा जीवन बदल दिया.

Inspiring Words

जब मेरे father जीवन की अंतिम साँसे गिन रहे थे तब,उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और कहा,बेटा मेरे पास तुजे देने के लिए खास कुछ नहीं हे,लेकिन मेरे पास एक simple सी सलाह हे जो तुम्हे life में बहुत उपयोगी होगी,मेरे पिताजी ने मरते वक्त मुझे यही सलाह दी थी और वही suggestion के मुताबिक बर्ताव के कारण में life की काफी problems से बच गया था,आज वही सलाह में तुजे देने जा रहा हु,जो तू याद रखना और उसके मुताबिक ही व्यवहार करना तो तुम्हे life में बहुत सुख प्राप्त होगा.

Gurdjieff के मुताबिक उस वक्त उनकी उम्र 9 साल की थी,इसलिए मेरे father ने कहा की अभी तू बहुत छोटा हे,इसलिए तुजे यह बात समज में नहीं आएगी,लेकिन यह बात तू याद रखना और बड़ा होकर उस हिसाब से ही behave करना जिससे तुजे जीवन में बहुत फायदा होगा.

Small Inspiring Words Of Gurdjieff’s Father

Gurdjieff कहते हे की मेरे father ने मुझसे कहा था की, “जब तुमको कोई अप शब्द कहे,भला बुरा कहे,तुन्हारी निंदा करे तो तुम तुरंत ही उसका जवाब मत देना,लेकिन 24 घंटे राह देखना,उस बात को 24 घंटे हो जाए उसके बाद ही तू सोचकर और तुमको ठीक लगे वह जवाब देना“.

Gurdjieff कहते हे की उस वक्त में छोटा था लेकिन मेरे पिताजी द्वारा कहे गये शब्द मुझे बरोबर याद रह गये और वास्तव मे में उस वक्त से उसी मुताबकि बर्ताव करने लगा,मेरे पिताजी तो चले गये लेकिन उनकी वह आखरी बात मेरे dil में बस गई.

कोई मेरा अपमान करे,मेरे विषय में खराब बोले तो तुरंत ही में भी उसे कुछ सुना दू ऐसी इच्छा होती लेकिन तभी मुझे मेरे पिताजी द्वारा कहे गए शब्द याद आते और उनकी मृत्यु के वक्त का वह द्रश्य मेरे सामने आता,तुरंत ही में रुक जाता,मेरे लब्ज तक आये हुए शब्द वापिस लौट जाते,में खुदको समजाता की मुझे मेरे पिताजी द्वारा कहे गए शब्द के अनुसार ही बर्ताव करना हे,मुझे ज्यादा समय तक wait भी कहा करना हे,24 घंटे बाद तो में उसे ऐसा जवाब दूंगा की वह फिर से मुझे ऐसा कहने की हिम्मत नहीं करेगा.

Gurdjieff कहते हे की किसीके द्वारा की गई निंदा या फिर कहे गए अपशब्द के सामने तुरंत प्रतिक्रिया न देने के कारण कितने लोग शुरुआत में यह मान लेते की में डरपोक हु और इस वजह से में लोगो को जवाब नहीं दे पाता,इसके कारण कई बार में जो नहीं था लोग मुझे वह समजते थे,वह बात मुझे बहुत बुरी लगती,लेकिन मेरे father द्वारा कहे गये आखरी शब्दों को यादकर में तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं देता,जब मुझसे रहा नहीं जाता तो में केवल उतना ही कहता की आपकी बात एकदम गलत हे, लेकिन आपकी बात का में कल answer दूंगा.

How Inspiring Words Change Thoughts

उनका कहना हे की कई बार तो 24 घंटे के दौरान में दूसरी व्यक्ति द्वारा कही गई बात को ही भूल जाता,कई बार मुजको वह बात याद आती लेकिन मुजको वह बात को इतना important देना योग्य नहीं लगता,इसलिए में कुछ कहता ही नहीं,कई बार तो ऐसा भी होता की यदि किसी ने मेरी बुराई की होगी तो मुझे वह सच लगता,तब मुझे लगता की उसने जो बात कही हे वह जब सच हे तो उसके विषय में चर्चा या फिर लड़ाई झगडा क्यों करना,सचमे तो मुझे मेरी वह खामी को सुधार लेना चाहिए.

 

और हम दोनों कुछ हुआ ही नहीं हे उस तरह बर्ताव करते,इस वजह से जो मेरे आलोचक और जो मेरे विषय में गलत बाते करते थे उनके साथ मेरे relation बेहतर होने लगे,यह कोई छोटा मोटा benefit नहीं था,मनुष्य जब एक दूसरे के साथ अच्छे relation रखकर जीता हे तब उसके जीवन में मिठास ही मिठास रहती हे.

Inspiring Words Magic Effect

इस तरह पिता की एक छोटी सी सलाह के कारण Gurdjieff की पूरी life change हो गई,जैसे कि उनके जीवन में कोई क्रांतिकारी बदलाव आया,एक छोटा सा सूत्र जीवन के मंत्र के समान बन गया और पूरी life उससे control होने लगी.
यदि हम सोचेंगे तो 24 घंटे बहुत छोटे लगते हे,लेकिन यदि वास्तविक तोर पर देखे तो मनुष्य को बदलने के लिए या फिर सोचने के लिए यह समय पर्याप्त हे,काफी समय तो परिवर्तन के लिए हमारे अंदर की विवेक बुद्धि से भी changes automatically हो जाते हे.
कई बार तो समय काम कर जाता हे,आपने काफी बार सुना होगा की यदि कोई चीज हमारे बस में न हो तो उसे समय पर छोड़ देना चाहिए,समय अपना काम अपने आप करेगा.
यदि बारीकी से देखे तो एक बात clear होती है कि जब मनुष्य के अहंकार को चोट लगाती हे तब वह तुरंत ही उसकी प्रतिक्रिया देता हे,तब वह सही गलत के विषय में भी नहीं सोचता,बात में कितनी सच्चाई हे उसपर भी गौर नहीं करता,यदि हम किसीकी बात का प्रतिकार करेंगे तो सामने वाला भी हमे दूसरी दो चार खरी खोटी सुनाएगा और बात और ज्यादा बिगड़ेगी.
कई बार तो ऐसा होता हे की बात इतनी important भी नहीं होगी,इस तरह से अर्थ का अनर्थ हो जाता हे और relation खराब हो जाते हे.
संसार में जीने के लिए मनुष्य को जितनी संपत्ति की जरुरत पड़ती हे उस तरह से relation में भी उत्साह की जरुरत पड़ती हे,मनुष्य जितना ज्यादा गुस्सा होगा उतना ही वह ज्यादा उग्र और उसकी प्रतिक्रिया तीव्र होगी.
यदि किसी भी बात को समझ बूझ के साथ सोचें तो हमको आलोचकों(critics) का आभार मानना चाहिए क्युकी उनकी टिका के कारण ही हम हमारे behavior के प्रति जागृत होते हे और आपत्तियो से हम बच जाते हे.
Conclusion:-
जिस तरह लोहा गरम होने के बाद थोड़ी देर बाद ठंडा हो जाता हे उसी प्रकार हमारा जुस्सा भी थोड़ी देर बाद शांत हो जाता हे,बस आवश्यकता होती हे थोड़ी देर राह देखने की,यदि हम चाहते हे की किसीके साथ हमारी नोक जोक न हो,हमारे सभी के साथ relation अच्छे हो तो हमे भी गुरजिएफ के father द्वारा कही गई छोटी सी बात को जरुर ध्यान में रखना चाहिए.
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