One More Try-कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती

कोशिश-Try is everything, “लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती; कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती”

मनुष्य के जीवन में जो भी दुःख और दर्द आते हे वह सब भगवान् की planning होती हे, वह सब व्यक्ति के विकास के लिए होता हे, लेकिन हम बिना समजे उसको दुःख में से बाहर निकालने के लिए प्रयत्न करते हे.

कई बार हम भगवान् के planning के विरुद्ध जा रहे होते हे, लेकिन उसका यह अर्थ कदापि नहीं हे की दुःख में किसी व्यक्ति के प्रति दया या सहानुभूति न दिखाई जाए, लेकिन भगवान् ने जो दुःख-दर्द दिया हे उसका स्वीकार कर लेना चाहिए.

कभी हार न माने यह शिखाते हे यह Motivational Thoughts 

हरेक मनुष्य का जीवन हररोज एक जैसा नहीं रहता, कुछ दिन, महीने, साल सुख के होते हे तो कुछ दिन, महीने, साल दुःख के भी होते हे, हम सब को सुख के दिन बहुत पसंद होते हे, लेकिन सही मायने में देखा जाए तो सुख के दिनों में हमारा सही तरीके से विकास नहीं होता, मनुष्य का विकास तो दुःख के दिनों में ही होता हे, दुःख से मनुष्य के जीवन का निर्माण होता हे, जीवन संघर्ष से भरा हे.

Let’s Try:- कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती

जीवन में संघर्ष तो आने वाले ही हे, यदि जीवन में कुछ साबित करना ही हे तो हरेक परिस्थिति में लड़ने के लिए तैयार रहना ही होगा, मेरे पास यह सुविधा नहीं हे इसलिए में सफल नहीं हो सकता, यदि में यह कार्य न करू, ऐसा जो सोचकर बैठा रहता हे उसको पूरा जीवन बैठे ही रहना पड़ता हे, जीवन में जो संसाधन मिलते हे उसको जो सफलता की सीडी बनाना जानता हे वही जीवन में प्रगित कर सकता हे.

Try

इस मौके पर स्वामिविवेकानंद के शब्द याद आते हे, “जो साहसिक होता हे वह हर वक्त कुछ न कुछ करने को तैयार रहता हे, जीवन में कुछ बड़ा काम करना होगा तो हमे हमारे हाथो को हिलाना पड़ेगा, मेहनत करनी ही पड़ेगी, साहस करना ही होगा”.

सिडनी स्मिथ के शब्द हे, “थोड़े साहस और पुरुष प्रयत्न के अभाव के कारण कई प्रतिभाए विश्व में खो जाती हे” हमे अपने आप को कभी कम आंकना नहीं चाहिए, दुःख किस के जीवन में नहीं आता?, वह एक बड़ा प्रश्न हे, बालक होगा या किशोर, पुरुष होगा या स्त्री, गृहस्त होगा या त्यागी हरेक के जीवन में दुःख के दिन आते ही हे, संघर्ष आता ही हे.

भगवान मेरी और आपकी मदद कब करेंगे 

जिसने जीवन में देश के लिए, समाज के लिए, धर्म के लिए कुछ किया हे वह दुःख के सामने लड़े ही हे, फिर वह गांधीजी होंगे या स्वामी विवेकानंद, स्वामी विवेकानन्द जब हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रचार और प्रसार के लिए पहेली बार अमेरिका गये और विश्व हिन्दू परिषद में 11 September 1893 को प्रवचन दिया तब उन्हें भी काफी दुःख सहने पड़े थे.

पैदल चलकर घूमना पड़ा था, कई राते बिना खाए पिए गुजारनी पड़ी थी, काफी संघर्ष करना पडा था, स्वामी नारायण सम्प्रदाय मेंसे सौ प्रथम संत के तोर पर मुक्तजीवन स्वामी बापा और शास्त्री श्री आनंदप्रियदासजी स्वामी पहली बार 1948 में आफ्रिका गये तब उन्हें भी दुःख आये थे.

इसलिए कहा गया हे…

“गाढ़ रेगिस्तान में शीतल छाव की आश न कर

सिवाय कांटो के यहाँ किसी का विकास नहीं हे

कृपा इतनी बरसी हे, मृगजल के रुपमे

हमे थक कर कहना पड़ रहा हे की प्यास नहीं हे”

इस तरह जीवन में दुःख तो आते ही रहेंगे, जीवन में कुछ हासल करना होगा तो दुःख तो आयेंगे ही आयेंगे, हमे ऐसे महापुरुषों के जीवन से दुःख आये तब विचलित न होना और सुख आये तब ज्यादा हवामे नहीं उड़ना वह शिखना हे.

भगवान् सबको सुख दुःख देते ही हे, मनुष्य के जीवन का निर्माण दुःख से ही होता हे, ठीक उस तरह पशु, पक्षी, प्राणी भी दुःख से ही निर्मित होते हे.

भगवान् ने ऐसी रचना की हे की कोकून में से बाहर निकलने के लिए तितली को बेशक पीड़ा होती हे, क्युकी तितली की पंखे फूल गयी गई होती हे.

जब तितली संघर्ष कर कोकून मेंसे बाहर निकलती हे तब उसके पंखो में भरा प्रवाही निकल जाता हे और उसके पैरो में आकर वह पैरो को मजबूत बनाता हे, फिर प्रवाही खाली होने के बाद तितली उड़ सकती हे.

7 आदते जिसे भगवान श्री राम ने उन्मुक्त की थी 

एक कोकून को तोड़कर तितली बाहर निकलने के लिए प्रयास(try) कर रही थी, वहा से गुजरने वाले एक आदमी की नजर इस कोकून पर पड़ी, उसको तितली की पीड़ा देखकर काफी  दुःख हुआ और उसने कोकून को एकदम से तोड़ दिया, उस आदमी की यह सोच थी की तितली के बाहर निकलने का रास्ता आसान बना देता हु, कोकून तोडा इसलिए तितली बाहर तो आई लेकिन वह ठीक से चल नहीं पा रहा थी, वह बहुत कमजोर थी, वह गिर पड़ी और उड़ नहीं पायी.

उस आदमी ने जब कोकून को तोड़कर तितली को बाहर निकाला तब तब उसने भगवान् की योजना के विरुद्ध उसकी मदद की और तितली को अपंग बना दिया.

मनुष्य के जीवन में भी दुःख-दर्द वह भगवान की योजना हे, यह व्यक्ति के विकास के लिए होता हे, लेकिन हमारी नादानी के कारण हम उसे दुःख मेंसे राहत दिलाने के लिए प्रयत्न करते हे, लेकिन कई बार हम भगवान् की योजना से विरुध्ध जा रहे होते हे, इसका यह अर्थ कदापि नहीं हे की हमे दुःख में किसी के प्रति दया और सहानिभूति नहीं दिखानी चाहिए, लेकिन भगवान ने जो सुख-दुःख दिया हे उसका स्वीकार कर लेना चाहिए, उसमे ही हमारा हित और स्वार्गी विकास हे. दुःख से ही जीवन का निर्माण होता हे, इसलिए जब जीवन में दुःख आता हे तब हाय हाय नहीं करना चाहिए लेकिन यह तो होता ही हे ऐसा कहना चाहिए.

इसीलिए कहा हे…

घबराना नहीं, खड़े रहना नहीं,

गिर जाए भले, लेकिन मन से गिरना नहीं,

दोस्त तुम्हारी यात्रा तुम्हे ही करनी हे,

आँखे गीली भले होगी लेकिन कभी रोना नहीं…

 

 

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