सत्यता की जाँच के बिना केवल said,heard,viewed बात पर believe मत करें

First Check Then Believe,हम मनुष्य किसी बात को सत्य(Truth) मान कर फिर उसके साथ एहसास(Feeling) से जुड़ते हे,उसके कारन सत्य सामने होनेके बावजूद दीखता नही हे,हमने जिसको सत्य मान लिया हे उसके सत्यता की जाँच के लिए भी हमे सजाग(Cautious) रहना चाहिए.

कभी भी बिना Reality परखे Believe मत करे

Don't believe on said,heard and viewed things

एक गॉव(Village)  में एक विधुर(Widower) पुरुष अपने इकलौते पुत्र(Son) के साथ रह रहा था,वह एक बार जब व्यापार(Business) के काम से बाहर गया तब गॉव में डाकुओ(Robber) ने डकेती डाली,इस में काफी लोग मारे गये,उन्होंने काफी लोगो के घरो(Homes) को जला डाला,और जाते जाते डाकू लोग वह व्यापारी(Businessman) के लड्के(Boy) को उठा ले गये,व्यापारी जब वापस अपने गॉव लौटा तो गॉव में हुए विनाश को देखकर मूर्छित(Unconscious) होकर गिर पड़ा,जब उसको होश आया तब वह रोते रोते अपने लडके को खोजने लगा,जब वह अपने लडके को गॉव में खोज रहा था तब उसे अपने लडके जेसे हुबहू देखने वाले कोई बालक की आधी जली लाश(Dead body) मिली,यह देख वह खूब रोया और फिर दाह्स्न्कार(Cremation) विधि समाप्त कर अस्थिओ(Bone)को एक थैले में भर ली,थोड़े दिनों बाद वह लड़का डाकुओ की चुगाल से भागकर गॉव में आया,वह आधी रात को घर पर पहुचा,उसने घर पर जाकर आवाज लगाई तो निंदमे व्यापारी ने पूछा की,कौन हे? लडके ने बाहर से जवाब दिया की में आपका लड़का हु, दुखी व्यापारी को लगा की कोई लडका उसके साथ मजाक(Joke) कर रहा हे,इसलिए उसने गुस्से होकर कहा की मेरा कोई लड़का नही हे,तुम यहा से चले जाओ,यह सुनकर वह लडका रोने लगा,थोड़ी देर तक वह लडकेने राह देखि और फिर वहा से चला गया,और फिर पिता और बेटा जिन्दगी(Life) में कभी नही मिले,देखा “Believe” का क्या महत्व हे.

यह कथा सुनाकर बुद्ध(Buddha) ने कहा,जीवनमे आप किसी बात(Thing) को सच मानकर फिर उसके साथ एहसास(Feeling) से जुड़ते हो,परिणाम स्वरूप सच सामने होनेके बावजूद दीखता नही हे,हमे सत्य(Truth) के साथ लगाव(Attachment) होनेके बावजूद यह भी जरूरी हे की हमने जो बात को सत्य मान ली हे उसकी सत्यता(Authenticity) की जाँच के लिए भी हमे सजाग रहना चाहिए,फिर ऐसा न हो की सत्य अंधश्रद्धा(Fetish) बन जाए और बादमे हमे पछताना(Repent) पड़े.

हमारे साथ कई बार ऐसा होता हे जब हम किसी कही-सुनी या देखि(Viewed) बात को सच मान लेते हे और उसपर believe कर लेते हे फिर उसीके मुताबिक सोचने लगते हे और उसीको सच मानने लगते हे,इसके कारन हमारे जीवनमे काफी Disturbance हो जाते  हे,कितने रिश्ते(Relation) टूटजाते हे उसमे कड़वाहट आ जाती हे,गलत फेहमी हो जाती हे,और बाद में जब सच्चाई का पता चलता हे तो वह कुछ और ही होता हे और तब हमारी हालत खराब हो जाती हे,इसलिए किसीभी बात की खराई के बिना भरोषा(Trust) मत करे,1 बार सच्चाई की परख (Checking)जरुर कर ले,यदि बादमे पश्चाताप(Repentance) से बचना हे तो.

Now,किसीभी कही,सुनी और देखि बात Believe करनेसे पहले उसकी सत्यता की जाँच कर ले.

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