बेशर्म और लज्जाशील व्यक्ति की मानसिकता में क्या फर्क हे?

What is difference between shameless and demure people? ‘अध्यातमकल्पद्रम’ नामक संस्कृत जैन ग्रंथ के एक श्लोक में ऐसे सद्गुणों का निरूपण हे जिसके लिए ग्रंथकार स्वयं लिखता हे यह गुण(quality) यह लोक और परलोक में सम्पदा(estates) कारण बनते हे, सबके लिए फायदे कारक साबित होते हे.

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यह गुणों में उन्होंने दो गुण दर्शाये हे, एक हे शिथिलता(procrastination) और दूसरा हे लज्जा, शिथिलता एक ऐसा गुण हे जिसके कारण व्यक्ति सामने वाली व्यक्ति को किसी कार्य के लिए तुरंत कह नहीं सकती हे, फिर भले खुद को इसके कारण थोड़ी प्रतिकूलता हो,उसे चलाकर वह दूसरे को सहयोग देता हे,शुभ(auspicious) कार्यो में यह गुण बहुत ही महत्वपूर्ण होते हे.

दूसरा जो गुण हे वह हे,लज्जा-शर्म के कारण व्यक्ति उसे गलत कार्य करने की भलेही कितनी ही इच्छा क्यों न हो लेकिन वह इसे करने से रुक जाएगा,जैसे कोई तीव्र विकार दशा के कारण व्यक्ति को विजातीय पात्र के साथ अनैतिक(Immoral) संबंध बांधने की इच्छा हो फिर भी यह लज्जा और शर्म उसको सामने के पात्र के साथ अशोभनीय मांग(demand) करने से रोकेगी.

वह पहले सोचेगा में ऐसा कैसे बोल सकता हु? फिर वह वही लज्जा और शर्म के कारण सोचेगा की, यदि ऐसा अनैतिक कार्य करते हुए में पकड़ा गया तो,मेरा क्या हाल होगा! मेरी family की parents की क्या हालत होगी,उनको क्या क्या सुनना पड़ेगा!

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मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को पैसे की बहुत जरुरत हे और वह पैसे वह किसी जगह से आसानी से चुरा सकता हे फिर भी लज्जा उसे यह कार्य करने से रोकेगी, वह  सोचेगा कि यदि में पकड़ा गया तो मेरी हालत कितनी शर्मनाक हो जायेगी, में समाज में अपना सिर ऊंचा रखकर नहीं जी पाऊंगा,मेरा तो घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा,“लज्जा-शर्म इस तरह गलत कार्य करने से रोकती हे”.

shameless

इस संदर्भ में एक ऐसे ही चिंतन वाक्य को याद करते हे, “यदि पाप(sin) करने से बचना हे तो,अपनी आँखों में शर्म के आंसू को स्थान दीजिये”.

यह सभी चीजों को ध्यान में रखकर एक बात तो पक्की हे की, समझ(understanding) के कारण पाप न हो वह अवस्था सर्वश्रेष्ठ हे और यह जरुरी भी हे और साथ में दूसरी बात भी विशिष्ट है कि यदि शर्म के कारण पाप करने से रोका जा सकता है तो यह अवस्था भी इच्छनीय हे, क्योंकि इससे अंत में तो पापा पर ब्रेक ही लगती हे.

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साथ में यह भी हे की जो व्यक्ति निर्लज्ज हे,बेशर्म(shameless) हे,वह पाप करने से आसानी से नहीं रुकेगा, क्युकी उसके पास न तो शर्म हे नहीं समझ हे,ऐसी व्यक्ति बेधड़क पाप करेगी और लज्जित होने के बजाय शान से जियेगी, ऐसे व्यक्ति के लिए एक बहुत ही कड़वी हिंदी पंक्ति हे,“वह इतने बेशर्म(shameless) हैं कि शर्म खुद उनसे शरमाती हे”.

Shameless and Demure People-बेशर्म और लज्जाशील की मानसिकता में कितना फर्क हे यह एक story से समझते हे.

एक राज्य में चार व्यक्ति थे और उन चारो ने एक ही जैसा अपराध किया था लेकिन जब उन चारो को सजा सुनाई गई तो राजा ने उनको अपने एक जैसे अपराध के लिए अलग अलग सजा फ़रमाई, पहले अपराधी को राजा ने सिर्फ इतना कहकर छोड़ दिया की ” यह तुमको शोभता हैं?” दूसरे अपराधी को राजा ने थोड़ी कड़क सजा देकर कहा “तुम्हारे माँ-बाप की इज्जत की तुमको कुछ पड़ी हे या नहीं?”क्या सोचकर तुमने यह कृत्य किया? इतना कहकर उसे भी छोड़ दिया, तीसरे अपराधी को राजा ने गुस्से होकर राज्य छोड़ देने का आदेश दिया,चौथे अपराधी के लिए राजा ने आदेश दिया कि “इसका मुंह काला कर,सिर मुंडवाकर, इसे गधे पर उल्टा बैठाकर पुरे राज्य में घुमाया जाए”.

राजा द्वारा दी गई सजा को देखकर वहा उपस्थित सभी लोग सोचमे पड़ गए की सबने अपराध तो एक ही किया हे तो सबको अलग अलग सजा क्यों सुनाई गई,वह सब ने बहुत ही जिज्ञासा( curiosity) से राजा को पूछा कि आपने ऐसा क्यों किया? तब राजा ने मुस्कुराते हुए कहा की इसका जवाब आपको कल मिल जाएगा!

राजा ने अपने सैनिको से कहा की उन चारो ने सजा के बाद क्या किया उसका report लाकर उनको दे.

Report आया: जिस व्यक्ति की राजा ने केवल थोड़ी सी निंदा(condemnation) की थी वह व्यक्ति बहुत ही लज्जाशील थी,सबके बिच में अपनी निंदा होते देख उसको बहुत बुरा लगा और उसने नदी में कूदकर अपनी जान दे दी, लोग यह सुनकर चौंक गए.

दूसरा व्यक्ति जिसको राजा ने नालायक कहा था,उसने अपने परिवार से  कहा की अब मेरा इस राज्य में रहना मुश्किल हे और वह अपने परिवार के साथ राज्य छोड़कर चला गया.

तीसरे व्यक्ति ने कहा कि इस राजा के राज्य में कोई मुहर नहीं लगी हे,बहुत से राज्य हे और वह बिना अफ़सोस के राजा की गलती निकालते हुए चला गया.

चौथा जिसको गधे पर बैठाया था वह तमाशा देखने आयी अपनी पत्नी को देख जोरसे बोला “बेशर्म अभी तो तीन गली ही घूमना बाकी हे,तुम नहाने के लिए पानी गर्म करो,में जल्द से आता हु,उसके शब्दों में जरा सी भी लाज-शर्म न थी, यह सुनकर सभी ने राजा का तालियों से अभिवादन किया और कहा की आपका न्याय एकदम उचित था.

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Conclusion:- 

यह पूरी story का सार यही है कि हम हमारी lifestyle को कभी इतनी shameless(वह चौथे व्यक्ति जैसी) न बनाये, बल्कि ऐसी लज्जाशील रखे जो हमे पाप करने से रोके,हमे पाप करने ही न दे.

 

 

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